पैसिव आय की ज़रूरत क्या है?

आप जान कर हैरान हो जाएंगे के 78 प्रतिशत लोगों का मन ना नौकरी में होता है ना व्यापार में। वो नौकरी और व्यापार दोनों सिर्फ इसलिए करते हैं क्योंकि उन्हें घर चलना है। समाज ने ज़्यादातर यही 2 विकल्प दिए हैं लोगों

को पैसा कमाने के। इसलिए 78 प्रतिशत लोग खुश नहीं हो पाते अपनी पूरी जिंदगी में क्योंकि वो लोग पैसा कमाने के लिए चाहे नौकरी करे करें या व्यापार, दोनों ही मन को मार कर करते हैं, बिना किसी रुचि के। उनकी रुचि है उनकी नृत्य, गायन, कविता, ट्रेवेलिंग आदि में लेकिन बेच रहे हैं वो म्यूचुअल फंड या फिर कहीं दुकान खोली हुई है।


इससे क्या होता है की पैसा कमाने के बाद भी लोग खुश नहीं रह पाते अपनी पूरी जिंदगी में। क्योंकि जब तक हम वो नहीं करते जो हमारी रुचि का हो, हम सही मायने में खुश नहीं रह सकते। लेकिन ये भी बहुत ध्यान देने की बात है कि जिंदगी के अलग अगल चरणों पर आपकी रुचि बदल सकती है।

जैसे मेरी एक दोस्त है जिसकी रुचि एक समय बहुत ज़्यादा नृत्य में थी लेकिन जब उसने नृत्य किया कुछ साल तो उसने पाया की उसकी रूचि असली में योग में ज़्यादा है। आज वो सिर्फ योग करती है और योग के साथ ही लोगों की मदद भी करती है और वो बहुत खुश भी है। बहुत ज़्यादा ज़रूरी है अगर आपको रूचि का काम करना है तो पहले एक ऐसी कमाई का साधन बनाओ जहाँ से आपको पैसे आते रहें ताकि आपकी दैनिक जरूरतें पूरी होती रहें। तभी आप अपनी रूचि का काम आराम से कर पाएंगे क्योंकि फिर आपकी रूचि का काम करके आपको पैसे आये या ना आये आप खुश रहेंगे क्योंकि रूचि वाला काम आप खुश रहने के लिए कर रहे हैं। ऐसा ना हो आप रूचि का काम कर रहे हैं लेकिन आपके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे।

बहुत बार लोग मुझसे पूछते हैं कि के कैसे पता लगाए कि जो वो कर रहे है हैं उसमे उनकी रूचि है या नहीं है। तो आप सभी पता लगा सकते हैं कि आप जो कर रहे हैं वो आपकी रूचि का काम है या सजा:

आप लोग जब आपकी पसंद का कोई खेल खेलते है हैं तब आपको कैसा लगता है? अगर आप क्रिकेट खेलते है हैं तो जब आप उसे 6 घंटे लगातार खेलते हैं तो आपको फील्ड पर पसीना आता है, आप मिटटी में गंदे हो जाते हो, साथ ही आपकी बहुत ज़्यादा मानसिक और शारीरिक ऊर्जा का भी इस्तेमाल होता है। फिर भी आप उस क्रिकेट के खेल को खेलने के बाद कैसा महसूस करते हो? ताज़ा एहसास करते हो या चेहरा उतरा हुआ होता है? आप असली में ताज़ा महसूस करते हैं हो और आपका मन करता है अगले दिन भी ऐसा ही एक और क्रिकेट का खेल हो जाये तो मजा आ जायेगा.। उसी तरह से आपको ये सोचना है कि आप जब अपनी नौकरी या व्यापार से बाहर निकलते हो शाम में 6 बजे तो आपको कैसा महसूस होता है? अगर आपका मन वैसे ही आवाज करता है जैसे के क्रिकेट खेलने के बाद अगले दिन के लिए करता है कि कल फिर से आएंगे और खेलेंगे मजा आएगा तो आप सही जगह पर हो। मतलब आपने देखा होगा हर ऑफिस में 2-4 प्रतिशत ऐसे लोग होते है जो हँसते हुए बाहर आते है और खुश होते है अगले दिन दुबारा दोबारा ऑफिस आने के लिए और काम करने के लिए। तो अगर आप उन 2-4 प्रतिशत लोगो लोगों में से है तो आप सही जगह पर हैं। लेकिन अगर आप गुस्से में, थके हुए और शनिवार, रविवार या किसी भी अन्य छुट्टी का इंतजार करते हुए रोजाना बाहर आते हैं तो आप वो काम कर रहे हैं जो आपकी रूचि का नहीं है। मतलब आपको ज़रूरत है इस परिस्थिति को जल्दी से बदलने की।

हम सबके अंदर एक बच्चा होता है जिसे बड़े होते हुए हम दबा देते हैं और सोचते हैं कि उस बच्चे से अलग होना ही बड़ा होना है। लेकिन वो बच्चा पूरी उम्र हमारे ही अंदर रहता है, कहीं किसी कोने में छुपा हुआ बैठा रहता है। डर से की कहीं वो बाहर आये तो जिम्मेदारियों का बोझ उससे मार ना दे। लेकिन वो बच्चा उसी में खुश होता है जो हमारी रूचि का काम होता है। जैसे अगर आपकी रूचि एक गायक बनने की है तो आपके अंदर का बच्चा तब ही खुश रहेगा आप जब आप कुछ गाएंगे। लेकिन आप क्या कर रहे हैं? किसी एक जगह बैठ कर GST रिटर्न भर रहे हैं।

लेकिन आप कभी किसी भी बुजुर्ग आदमी से पूछना जिनकी कोई रूचि रही हो जिसे वो पूरा ना कर पाए हों। जैसे ही आप 60 साल की उम्र पार करते हैं, तो आपके अंदर का वो बच्चा बाहर आने लगता है जिसको आपने छुपा रखा था। अब वो बच्चा आपको ये एहसास दिलाने लगता है के आपने जिंदगी सिर्फ घर बनाने, EMI भरने, बच्चों को पढ़ाने में निकाल दी। आप सभी के लिए जिए लेकिन खुद के लिए जीना भूल गए। जब आप अकेले होते हो बुढ़ापे में तब आपके अंदर वाला बच्चा ही सिर्फ आपके साथ होता है हर समय, तब आपके सभी दोस्त कहीं और रह रहे होते हैं और आपके बच्चे कहीं और। आपके अकेलेपन में आकर वो आपसे पूछेगा के आपने उसके साथ ऐसा क्यों किया? आप उसे कितना भी बता देना आपने पैसे कमाए, घर बनाया उसे फ़र्क नहीं पड़ेगा क्योंकि उसे तो गायक बनना था।



Kuch Bolna Chahte Ho Toh Bol Do

© 2020 by Sumeet Chauhan